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Sunday, 13 August 2017

जानें, रेलवे की वह स्कीम जिससे एक साल से भी कम समय में की 540 करोड़ की कमाई

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रेलवे ने फ्लेक्सी फेयर स्कीम के तहत एक साल से भी कम समय में 540 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व हासिल कर लिया है। फिलहाल रेल विभाग का इस योजना को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। पिछले साल 9 सितंबर को शुरू की गई इस योजना के तहत 42 राजधानी, 46 शताब्दी और 54 दूरंतो ट्रेनों में केवल दस फीसद सीटें सामान्य कीमत की होती हैं, लेकिन उसके बाद बची हुई हर दस फीसद बर्थ के किराये में दस फीसद का इजाफा होता जाता है। लेकिन, यह कीमत 50 फीसद से अधिक नहीं बढ़ाई जा सकती है।

आखिरी समय में सफर करने वालों को विशेष डिस्काउंट - 


पिछले साल दिसंबर में इस योजना की समीक्षा हुई थी और तब से आखिरी क्षणों में सफर करने वाले यात्रियों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के डिस्काउंट दिये जाने लगे हैं। इन प्रमुख ट्रेनों से 30 फीसद का तत्काल शुल्क भी घटा कर दस फीसद ही कर दिया गया है। राजधानी, शताब्दी और दूरंतो में आखिरी समय में यात्रियों को आकर्षित करने के लिये इन ट्रेनों की खाली बची बर्थ पर बेसिक किराये में दस फीसद की छूट दी जाने लगी है। इसके अलावा भी कुछ टेनों में डिस्काउंट स्कीमें चलाई जा रही हैं।

यह होता है फ्लेक्सी फेयर सिस्टम - 


भारतीय रेलवे की तरफ से लागू की गई फ्लेक्सी फेयर प्रणाली पूरी तरह से मांग-आपूर्ति पर निर्भर होती है। इसके तहत जिस समय टिकट की मांग ज्यादा होती है उस वक्त टिकट की कीमतें बढ़ा दी जाती है। ऐसा त्योहारी सीजन में ही होता है। वहीं, दूसरी ओर जब टिकट की मांग कम हो जाती हैं तब कीमतें सामान्य हो जाती हैं। अब तक हवाई जहाज की टिकटों में ऐसा होता था।

आपको बता दें कि ट्रेन में फर्स्ट एसी और एग्जिक्यूटिव कैटेगरी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होता है। इसमें शुरुआत में पहली 10 फीसद सीटों के लिए सामान्य किराया लागू होता है, इसके बाद प्रत्येक 10 फीसद बर्थ की बुकिंग के बाद किरायों में 10 फीसद की बढ़ोतरी कर दी जाती है। मांग के आधार पर इसमें अधिकतम 50 फीसद तक किराया बढ़ता है। सेकेंड एसी और चेयरकार के लिए अधिकतम 50 फीसद की बढ़ोतरी होती है। वहीं थर्ड एसी के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत अधिक होती है। अन्य चार्जेस जैसे कि आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट शुल्क, कैटरिंग शुल्क और सेवा कर में बदलाव नहीं होता है।
Courtesy: jagran

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